राजनीति vs राजधर्म
राजनीति में कभी-कभी ऐसा समय आता है जब ये लगता है कि किसी राजनेता के लिए राजधर्म ज्यादा मायने रखता है या राजनीति, आज हमारे पास इसके दो उदाहरण या यूं कहे कि मुख्यमंत्री है जिनमें से एक ने राजधर्म को अहमियत दी तो दूसरे ने राजनीति को, सबसे पहले बात करेंगे सीएम योगी आदित्यनाथ की जिनके पिता के मृत्यू हो जाने पर भी वो राजधर्म नहीं भूले, पिता की मृत्यू का समाचार एक ऐसा समय होता है जो किसी भी पुत्र के लिए उसके भावनाओँ के सागर को तोड़ दे लेकिन सीएम ने इस समाचार को पाकर भी अपने कर्तव्य का वहन किया क्योंकि जब उनको ये समाचार मिला था तब वो कोरोना मालले पर टीम 11 के मीटिंग में व्यस्त थे , उन्होंने बिना विचलित हुए उस मीटिंग को पूरी किया फिर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने पिता के लिए एक खत लिखा , जिसमें उन्होंने लिखा कि पिताजी के कैलाशवासी होने पर मुझे भारी दुख और शोक है. वे मेरे पूर्वाश्रम के जन्मदाता हैं. जीवन में ईमानदारी , कठोर परिश्रम और नि:स्वार्थ भाव से लोक मंगल के लिए समर्पित भाव के साथ कार्य करने का संस्कार बचपन में उन्होंने मुझे दिया. अंतिम क्षणों में उनके दर्शन की हार्दिक इच्...