'राजधर्म की टीस'
ये कौन सा राजधर्म है जो हमेशा समझाया जाता रहा कभी गुजरात के तत्कालीन मुख्यमन्त्री रहे नरेन्द्र मोदी को तो कभी मौजूदा गृहमंत्री अमित शाह को, हाँ ये और बात है की नरेन्द्र मोदी को राजधर्म उन्ही पार्टी के नेता और तत्कालीन प्रधानमंत्री 'अटल बिहारी वाजपेयी' ने याद दिलाई थी और अमित शाह को ये राजधर्म विपक्ष के नेता सोनिया और मनमोहन याद दिला रहे है... तो क्या हम मान ले कि गुजरात दंगो के बाद जिस जगह पर मोदी खड़े थे लगभग उसी जगह के आसपास आज शाह है क्योंकि अगर एक बार को विपक्ष के आरोप को नज़रअंदाज़ कर दे तो भी इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता की दिल्ली हिंसा में पुलिस की निष्क्रियता रही है और हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट इसके लिए पुलिस को फटकार भी लगा चुके है... इसके अलावा इस बात को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता की जिस हिंसा की शुरुआत रविवार से ही हो गयी थी उस पर संज्ञान अमित शाह ने 48 घंटे के बाद यानी मंगलवार को लिया और तबतक 7 लोगो की मौत हो चुकी थी जिसमे दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल रतनलाल भी शमिल थे और 100 से ज्यादा लोग घायल थे...उससे पहले अमित शाह अहमदाबाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के स्वगता समारोह में मशगूल थे हालाँकि तब उनकी ग़ैरमौजूदगी में जी. किशन रेड्डी ने मीडिया के सामने आकर मोर्चा संभाला, लेकिन उस समय सिर्फ मीडिया में आकर ये कह देना की 'ट्रम्प के भारत दौरे के तहत साजिशन हिंसा की घटना को अंजाम दिया गया' ये काफी नहीं था, अगर होता तो अगले और 2 दिनों तक ये हिंसा यूँही जारी नहीं रहती उसमें 34 लोगों की मौत और 200 से अधिक लोग घायल नहीं होते और तो और करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान भी नहीं हुआ होता, तो क्या जिस राजधर्म की सीख़ गुजरात दंगो के बाद तब के तत्कालीन प्रधानमंत्री 'अटल बिहारी वाजपेयी' ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को दी थी वो अब भी उतने ही महत्वहीन है जितने की तब थे , और इसलिए इस 'राजधर्म की टीस' हमेशा ही इस तरह की हिंसा की घटना के बाद महसूस की जाती रही है।
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निर्भीक पत्रकारिता।
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छा लिखा है आपने दिल्ली हिंसा पर।आप तो पत्रकारिता से जुड़ी हुई हैं तो व्यापक सोच रखती हैं,हम जैसे आम जनमानस के मन मे भी यही सवाल उठे थे कि इतने लम्बे समय तक शाहीन बाग का धरना चलना,दिल्ली में हिंसा का भड़कना,जामिया,जेएनयू आदि की ऐसी दुःखद घटनाएं हुई जिसमें केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पूरी तरह से विफल रहे,कारण चाहे जो रहा हो लेकिन समझ से परे है।
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