निर्भया की चिट्ठी...

निर्भया की चिट्ठी...

मेरे जाने के बाद क्या बदला माँ
दोषी पकड़े गए क्या
उन्हें सजा हुई क्या
जग मेरे उपर तो नहीं हंसा
मेरे समय और कपड़े पर किसी ने कुछ कहा क्या
तुम रोयीं तो क्या जग भी रोया माँ
मेरे जाने के बाद क्या बदला माँ ।


मेरे जाने के बाद क्या बदला माँ
अब तो हर लड़की सुरक्षित है न माँ
रात का अंधेरा उन्हें डराता तो नहीं
न जाने कब कौन आदमी के वेश में भेड़िया निकल जाए
ये डर उन्हें सताता तो नहीं
न्यायपालिका ने तेरी गुहार सुनी होगी
फाँसी की सज़ा भी ज़रूर हुई होगी
चुप क्यों है बता न माँ मेरे जाने के बाद क्या बदला ।


तेरी चुप्पी बताती है सड़क अब भी डरावनी है
तेरी चुप्पी बताती है रातें अब भी डरावनी है
तेरी चप्पी बताती है हालात अब भी डरावने है
तेरी चुप्पी बताती है मैं अब भी हर रोज़ मरतीं हूँ
तेरी चुप्पी बताती है मैं आज भी इंसाफ़ को तरसतीं हूँ
तेरी चुप्पी बताती है ,मेरे जाने के बाद कुछ नहीं बदला माँ
मेरे जाने के बाद कुछ नहीं बदला ।।

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